HND22BEB-05 Study Materials: English and Hindi versions of one story
Hindustan Times Story
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Pesticide cocktail in
Coke, Pepsi brands, says study |
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Centre for Science and Environment (CSE) on Wednesday came out with a fresh study claiming the presence of 'pesticide cocktail' in 11 brands of soft drink giants Coca Cola and PepsiCo, three years after the same brands were found to have contained pesticides. The new findings, publicised after testing 57 samples of 11 soft drink brands of Coca Cola and PepsiCo collected from 25 manufacturing units across 12 states, claim that all bottles examined were a "cocktail of 3-5 different pesticides", which was 24 times above the standards finalised by the Bureau of Indian Standards (BIS). "We have found pesticide residue in all soft drinks tested. Three years ago, when the tests were conducted we could spot only four pesticides. This time it has increased to five in some cases," CSE Director Sunita Narain said. The study—'Soft Drinks–Hard Truth II'—claims that the average amount of pesticide residues found in all the samples was 11.85 parts per billion, which is 24 times higher than the BIS standards for pesticides in softdrinks. In 2003, the average level of
pesticide residues in Delhi samples were 34 times above the same BIS standards. |
Navbharat Times Story
सॉफ्ट
ड्रिंक्स में
कई गुना
कीटनाशक :
सीएसई विशेष
संवाददाता
नई
दिल्ली, 2 अगस्त
सरकार पर कोला
कंपनियों के
हाथों खेलने
का आरोप सरकार पर कोला
कंपनियों के
हाथों खेलने
का आरोप लगाते
हुये सेंटर
फार साइंस
एण्ड
एन्वायरनमेन्ट
(सीएसई) की
निदेशिका
सुनीता नारायण
ने बुधवार को
कहा कि तीन साल
पहले उनके
संगठन द्वारा
कोल्ड
ड्रिंक्स में
कीटनाशकों की
मौजूदगी का भंडाफोड़
करने के
बावजूद देश
में आज भी
जहरीले कोल्ड
ड्रिंक्स की
बिक्री न सिर्फ
जारी है बल्कि
उनमें
कीटनाशकों की
मात्रा कई
गुना बढ़ गई
है।
दूसरी ओर, सीएसई के दावे को सिरे से खारिज करते हुए इन कंपनियों ने कहा कि उनके उत्पादों में कीटनाशक मौजूद नहीं और वह अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय मानकों का कड़ाई से पालन कर रही हैं।
सीएसई के ताजा दावे के मुताबिक देश में बिक रहे 11 कोल्ड ड्रिंक्स ब्रांडों के 57 नमूनों में मौजूद कीटनाशक भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) मानकों से 22 से 25 गुना अधिक मात्रा में पाए गए। ये नमूने देश के 12 राज्यों में स्थित कोका कोला और पेप्सीको के 25 अलग-अलग उत्पादन केन्द्रों से संग्रह किए गए थे।
सुशी नारायण के बताया कि सीएसई की जांच में कोलकाता से खरीदे गये कोकाकोला में लिंडिन की मात्रा बीआईएस मानकों से 140 गुना अधिक पायी गयी जबकि महाराष्ट्र के थाणे में निर्मित कोकाकोला के नमूने में 200 गुना अधिक मात्रा में क्लोरपाइरीफॉस मिला है। इन नमूनों की जांच सीएसई के पॉल्युशन मोनेटरिंग प्रयोगशाला में की गई है। प्रयोगशाला को आईएसओ 9001:2000 प्रमाणपत्र हासिल है।
सीएसई के पिछले भंडाफोड़ के बाद गठित संयुक्त संसदीय समिति ने फरवरी 2004 में सरकार को शीतल पेयों में मानक स्थिर करने का निर्देश दिया था। अक्टूबर 2005 में बीआईएस द्वारा मानकों का निर्धारण हुआ और 2006 में इन मानकों को स्वीकृति मिल गई। लेकिन इसकी अधिसूचना अभी तक जारी नहीं की गई है।
सूत्रों के मुताबिक केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय मानकों के निर्धारण में रोड़े अटका रहा है। उसकी दलील है कि इस बारे में अभी और शोध की जरूरत है। दूसरी ओर सीएसई के आरोपों के जवाब में कोला कंपनियों के साझा मंच ‘इंडियन साफ्ट ड्रिंक्स मैन्युफेक्चरर्स एसोसिएशन’ ने कहा है कि उपभोक्ताओं की सुरक्षा उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। भारत में बनने वाले सभी कोल्ड ड्रिंक्स अंतरराष्ट्रीय व भारतीय में लागू सभी मानकों का कड़ाई से पालन करती हैं।
एसोसिएशन के मुताबिक पिछले तीन वर्षों के दौरान उन्होंने कड़े वैज्ञानिक मानकों की स्थापना के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय, वैज्ञानिक समुदाय और स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ काम किया। उन्होंने कहा कि सरकार शीतल पेयों की जांच के मानकीकरण में संलग्न है और एसोसिएशन का हर सदस्य इस प्रक्रिया के साथ है और इसमें पूरा सहयोग कर रहा है।
http://www.hindustandainik.com/news/2031_1759399,0068.htm