HND22BEB Study materials for session 1

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The name I sent you in the letter… Navbharat Times (Monday July 24 2006) नाम तुम्हें भेजा है खत में... [Monday, July 24, 2006 10:07:35 pm ] विशेष संवाददाता नई दिल्ली : बीजेपी नेता और पूर्व विदेशमंत्री जसवंत सिंह ने पीएमओ में अमेरिकी जासूसी के बारे में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की चुनौती स्वीकार करते हुए सोमवार को उन्हें एक पत्र भेज दिया। पार्टी सूत्रों का कहना है कि पत्र के साथ उस लेटर की कॉपी भी अटैच की गई है, जो १९९५ में दिल्ली स्थित एक अमेरिकी राजनयिक ने एक प्रभावशाली सेनेटर को लिखा था। पार्टी सूत्रों ने कहा कि जसवंत ने बताया कि वह कोई नाम काटे बगैर प्रधानमंत्री को पत्र लिख रहे हैं। रविवार को प्रधानमंत्री ने कहा था कि जसवंत में अगर नैतिकता है, तो कथित जासूस का नाम बताएं। गौरतलब है कि जसवंत ने हाल में प्रकाशित अपनी किताब 'अ कॉल टू ऑनर' में सेनेटर को लिखे गए पत्र के कुछ अंश दिए हैं। इसमें जासूस का नाम नहीं है। राजनयिक ने बस इतना लिखा कि परमाणु सूचनाएं देने वाला व्यक्ति प्रधानमंत्री (नरसिंह राव) के बहुत नजदीक है। पत्र में यह भी जानकारी दी गई है कि प्रधानमंत्री परमाणु परीक्षण पर विचार के लिए बेंगलूर में बैठक करने वाले हैं। अभी यह ज्ञात नहीं है कि राजनयिक ने पत्र में जासूस के नाम का उल्लेख किया या नहीं। यह भी ज्ञात नहीं है कि आखिर जसवंत को पत्र की कॉपी कहां से मिली। उस राजनयिक ने दिया या सेनेटर ने? या किसी और ने? पत्र इतना संवेदनशील है कि राजनयिक ने सेनेटर से अनुरोध किया कि इस बारे में राष्ट्रपति तक को कुछ पता नहीं चलना चाहिए। यदि राजनयिक का दावा सही है तो सवाल उठता है कि यह व्यक्ति कौन था? सूत्रों का कहना है दो व्यक्ति राव के सबसे नजदीक थे। एक का संबंध राजनीति से था और दूसरे का प्रशासनिक सेवा से। शक की सुई इस अधिकारी की तरफ जा रही है। लेकिन बकौल जसवंत सिंह पीएमओ में अमेरिका के लिए जासूसी इस समय भी हो रही है। गौरतलब है कि जसवंत सिंह ने इसका जिक्र अपनी किताब में नहीं किया है। यह रहस्योद्घाटन उन्होंने अपनी किताब जारी होने के पहले एक साप्ताहिक को दिए इंटरव्यू में किया। इसके पीछे क्या है? माना जा सकता है कि वाजपेयी के शासन में जासूसी नहीं हो रही थी, क्योंकि सीधी बात यह है कि उस स्थिति में कैबिनेट मंत्री जसवंत सिंह कार्रवाई करवा सकते थे। जसवंत के कहने का अर्थ यह निकलता है कि दो कांग्रेसी प्रधानमंत्रियों के शासन में अलग-अलग व्यक्तियों ने अमेरिका के लिए जासूसी की। इस बीच, संसदीय कार्यमंत्री प्रियरंजन दासमुंशी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि यदि जसवंत सिंह ने वह पत्र दे दिया है, जिसमें उस जासूस का नाम है तो सरकार उसे सार्वजनिक कर देगी। रक्षा मंत्री प्रणव मुखर्जी ने भी मांग की कि जसवंत सिंह जासूस का नाम उजागर करें। यह पूछने पर कि क्या यह सब भारत और अमेरिका के बीच हुए परमाणु समझौते को पटरी से उतारने के लिए किया गया है, रक्षा मंत्री ने कहा कि जसवंत सिंह पहले ही कह चुके हैं कि उन्हें इसकी जानकारी बहुत पहले से थी। अब राष्ट्र के प्रति उनका दायित्व बनता है कि वह अपनी बात को साफ करें। http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/1802787.cms

English Version

Jaswant says he'll name mole in PMO

[ 24 Jul, 2006 2346hrs IST TIMES NEWS NETWORK ]

NEW DELHI:The guessing game about the former PMO functionary who, according to Jaswant Singh, leaked nuclear secrets to the US reached a feverish pitch on Monday with the BJP leader accepting the "name him, if you can" gauntlet flung at him by Prime Minister Manmohan Singh. Taking exception to the PM's phraseology, Jaswant Singh told his colleagues, according to BJP leader Sushma Swaraj, that he would forward to the PM on Tuesday the letter purportedly written by a US diplomat to a Senator about the American mole in P V Narasimha Rao's PMO. With Jaswant Singh and his colleagues tightlipped about the identity of the man, the needle of suspicion was moving wildly. The buzz was particularly strong about two officials who were part of the Narasimha Rao PMO and were known for their links with the Americans. Rubbishing Singh's claims, the PM on Sunday said, "If he has the decency and courage, he should name the person he is accusing of being a mole. We are not afraid of any debate on any issue." Jaswant Singh told a TV channel: "I am actually not given to indecent exposure and he (the PM) does not have to challenge me. I will seek a time with him. I will go and give him the document that I have." But he refused to divulge the name of the alleged mole. "I will not make public the names because there is a national purpose behind it." It is learnt that Jaswant Singh may speak to the Press on Tuesday. Meanwhile, defence minister Pranab Mukherjee too dared Singh to name the mole he talks about in his just-released book, 'A Call to Honour'. Picking up from where the PM had left off on Sunday, the defence minister said that "now he (Jaswant Singh) owes it to the nation to tell the truth